लोकसभा में पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने पूर्णिया में हाई कोर्ट बेंच की मांग को केंद्र में रखते हुए न्यायिक व्यवस्था की कमजोरियों, प्रशासनिक भ्रष्टाचार, जमीन–म्यूटेशन में लूट, शराबबंदी कानून की खामियों, निजीकरण, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर तीखे सवाल उठाए। सांसद पप्पू यादव ने स्पष्ट कहा कि बिहार जैसे बड़े और आबादी वाले राज्य में सिर्फ एक हाई कोर्ट आम आदमी के साथ अन्याय है। पूर्णिया सहित सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों को न्याय पाने के लिए पटना तक जाना पड़ता है, जो गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बेहद मुश्किल है। उनका यह भाषण आम जनता की आवाज बनकर सामने आया और देशभर में चर्चा का विषय बन गया।

शराबबंदी कानून पर सवाल उठाते हुए पप्पू यादव ने कहा कि इस कानून के नाम पर लाखों गरीब लोगों को जेल में बंद कर दिया गया है, जबकि असली दोषी खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने पूछा कि जो शराब बेचता है, जो पदाधिकारी रिश्वत लेकर मामले को रफा-दफा करता है, उनके लिए क्या कोई कानून है? गरीब आदमी केवल उपभोक्ता होने के कारण जेल चला जाता है, जबकि शराब माफिया और भ्रष्ट अधिकारी कानून से ऊपर बने हुए हैं। उन्होंने इसे कानून की असमान और अमानवीय व्यवस्था बताया।

भूमि सुधार और राजस्व व्यवस्था पर बोलते हुए सांसद ने म्यूटेशन और जमाबंदी में फैले व्यापक भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्णिया समेत बिहार के कई जिलों में पूर्णिया पूर्व प्रखंड के सीओ जमाबंदी और म्यूटेशन के लिए दो-दो लाख, पांच-पांच लाख रुपये तक वसूलते हैं। मिडिल क्लास और गरीब आदमी अपनी जमीन के कागजात तक नहीं बनवा पाता, जबकि जमीन माफिया सरकारी जमीन अपने नाम करवा लेते हैं। उन्होंने सवाल किया कि इस लूट के खिलाफ आखिर कौन सा कानून है।
बुलडोजर कार्रवाई पर सांसद पप्पू यादव ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सौंदर्याकरण के नाम पर गरीबों की दुकानों और घरों को तोड़ा जा रहा है, लेकिन उन्हें न वैकल्पिक व्यवस्था दी जाती है, न ही जमीन। न तो पांच डिसमिल जमीन दी गई, न ही शहर में दुकानदारों को व्यवस्थित किया गया। इसके उलट, सरकारी जमीन पर माफिया कब्जा कर रहे हैं और आम आदमी को कुछ नहीं मिल रहा। उन्होंने पूछा कि क्या गरीबों के लिए कोई संवेदनशील कानून सरकार के पास है।
अपने भाषण की शुरुआत उन्होंने इंडिगो एयरलाइंस के संकट से करते हुए की। उन्होंने कहा कि हालिया फ्लाइट संकट में पूरा देश मानो कैद हो गया था। उड़ानें बंद रहीं और आम लोग परेशान हुए, लेकिन पूंजीपतियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जो बड़े कॉरपोरेट देश से पैसा लूटकर भाग जाते हैं या देश के साथ खिलवाड़ करते हैं, उनके लिए जुर्माना और कानून क्यों नहीं है। क्या कानून सिर्फ गरीबों के लिए ही बने हैं?
शिक्षा और स्वास्थ्य के निजीकरण पर बोलते हुए सांसद ने कहा कि भारत में ‘वन नेशन, वन हेल्थ’ और ‘वन नेशन, वन एजुकेशन’ की बात तो होती है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। उत्तर प्रदेश में 60 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद हो गए, देशभर में सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर की जा रही हैं। आईआईटी, आईआईएम जैसे संस्थानों को भी निजी हाथों में देने की तैयारी है। उन्होंने पूछा कि क्या निजी अस्पतालों और डॉक्टरों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए कोई मजबूत रेगुलेटरी बॉडी बनेगी।
न्याय व्यवस्था पर चिंता जताते हुए पप्पू यादव ने कहा कि देश की अदालतों में जजों की भारी कमी है और लाखों मामले लंबित हैं। चार्जशीट लिखने वाले अधिकारी सरकार के प्रभाव में रहते हैं, जिससे गरीब आदमी जेल में सड़ता है और पैसे वाले बाहर घूमते हैं। उन्होंने जजों और नौकरशाही की जवाबदेही तय करने की मांग की और कहा कि जब तक सिस्टम में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक न्याय सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा।
अपने संबोधन के अंत में सांसद पप्पू यादव ने केंद्र सरकार से अपील की कि अधिक से अधिक जजों की नियुक्ति की जाए और बिहार में अतिरिक्त हाई कोर्ट बेंचों का निर्माण किया जाए, विशेषकर पूर्णिया में। उन्होंने कहा कि लोअर और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स के पास पर्याप्त अधिकार नहीं हैं, इसलिए लोगों को बार-बार हाई कोर्ट जाना पड़ता है। न्याय की सुलभता ही लोकतंत्र की असली पहचान है और इसके बिना आम आदमी का भरोसा व्यवस्था से उठता चला जाएगा।


