बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। जहाँ एनडीए (NDA) स्पष्ट रूप से सत्ता में वापसी करती दिख रही है, वहीं विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) भारी नुकसान झेलने के बावजूद सबसे ज्यादा वोट शेयर पाने में सफल रहा है।
तेजस्वी यादव के लिए यह परिणाम मिश्रित संदेश लेकर आए — सीटें कम, लेकिन वोट अधिक।

RJD का वोट शेयर BJP और JDU से ज्यादा
गिनती के छह घंटे बीतते-बीतते तस्वीर साफ होने लगी। RJD को 22.84% वोट शेयर मिला, जो कि —
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BJP से 1.86% अधिक
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JDU से 3.97% अधिक है
यह तब है जब RJD ने 243 में से 143 सीटों पर चुनाव लड़ा।
हालाँकि सीटों के मामले में पार्टी पीछे दिख रही है — वर्तमान रुझानों के अनुसार पार्टी सिर्फ 27 सीटों पर आगे है।
2020 से 2025: RJD के प्रदर्शन में गिरावट
2020 में RJD राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
लेकिन इस चुनाव में RJD का प्रदर्शन 2010 के बाद का सबसे कमजोर माना जा रहा है।
2010 में पार्टी सिर्फ 22 सीटों पर सिमट गई थी, और 2025 इसका दूसरा सबसे खराब चुनाव कहा जा सकता है।
तेजस्वी यादव खुद भी पिछड़ रहे
महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से पीछे चल रहे हैं।
अब तक —
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तेजस्वी को मिले वोट: 33,347
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बढ़त BJP उम्मीदवार सतीश कुमार के पास: 2,288 वोट
यह रुझान RJD के जनाधार में हो रहे बदलाव को दिखाता है, भले ही वोट शेयर अधिक हो।
NDA की बड़ी बढ़त: 201 सीटों पर आगे
एनडीए इस चुनाव में भारी जीत की तरफ बढ़ रही है। ताज़ा रुझान इस प्रकार हैं—
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BJP: 91 सीटें आगे
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JDU: 81 सीटें आगे
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LJP (राम विलास): 21 सीटें
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HAM: 5 सीटें
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RLM: 4 सीटें
वहीं महागठबंधन के बाकी दल भी पीछे छूटते दिख रहे हैं—
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कांग्रेस: 4 सीटें
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CPI(ML): 4 सीटें
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CPI: 1 सीट
जन सुराज और वीआईपी सभी सीटों पर पीछे चल रहे हैं।
महिलाओं ने दिखाया रिकॉर्ड उत्साह
बिहार ने इस बार इतिहास का सबसे बड़ा मतदान दर्ज किया — 66%।
वोटिंग में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया:
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पुरुष मतदाता: 62.8%
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महिला मतदाता: 71.6%
यह रुझान बिहार की राजनीति में महिला शक्ति के बढ़ते प्रभाव को साफ दर्शाता है।
हालाँकि RJD सीटों में भारी नुकसान झेल रही है, लेकिन सबसे अधिक वोट शेयर पाकर पार्टी ने दिखाया कि उसका जनाधार अब भी मजबूत है।
दूसरी ओर NDA ने सीटों में अभूतपूर्व बढ़त हासिल कर सत्ता में वापसी लगभग सुनिश्चित कर ली है।
तेजस्वी यादव के लिए यह चुनाव संकेत है कि जनसमर्थन को सीटों में बदलने की रणनीति पर नए सिरे से सोचने की ज़रूरत है।


