NDA की बंपर जीत और चिराग का चमकता प्रदर्शनबिहार विधानसभा चुनाव 2025 कई मायनों में ऐतिहासिक रहा—एक तरफ़ एनडीए (NDA) की जबर्दस्त जीत, दूसरी तरफ़ नितीश कुमार–मोदी की जोड़ी का जबरदस्त प्रभाव। लेकिन इन सबके बीच सबसे ज़्यादा चर्चा में रहा एक युवा चेहरा—चिराग पासवान, जिन्होंने इस चुनाव में खुद को बिहार की राजनीति में मजबूती से स्थापित कर लिया। एनडीए में कड़ा मोलभाव करते हुए उन्होंने अपनी पार्टी LJP (राम विलास) के लिए 29 सीटें हासिल कीं और इनमें से 19 पर बढ़त लेते हुए 65% की शानदार स्ट्राइक रेट दर्ज की।

2020 की हार और पार्टी टूटने के बाद शानदार वापसी
2020 के चुनाव में एलजेपी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था—130 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़कर सिर्फ़ 1 सीट जीतना पार्टी के लिए बड़ा झटका था। इसके बाद 2021 में पार्टी का बंटवारा और चाचा पशुपति पारस से संघर्ष ने चिराग को राजनीतिक तौर पर कमजोर कर दिया। कई विशेषज्ञों ने कहा कि वे अपने पिता राम विलास पासवान की विरासत को आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं होंगे। लेकिन यही वह दौर था जिसने चिराग के भीतर नए राजनीतिक संकल्प को जन्म दिया।
युवा नेता की नई छवि और दलित राजनीति की जड़ें
43 वर्षीय चिराग ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को एक ‘युवा बिहारी’ नेता के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने युवाओं, दलितों और हाशिये पर खड़े समुदायों को अपनी राजनीति के केंद्र में रखा। यही वजह है कि 2024 लोकसभा चुनाव में LJP (RV) ने जहां भी उम्मीदवार उतारे—सभी 5 सीटें जीतीं। यह 100% स्ट्राइक रेट उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भी एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है।
सीट शेयरिंग में कठोर रुख और NDA में मजबूत स्थिति
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले BJP और JDU, LJP (RV) को 20 से ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं थे। इस पर चिराग ने प्रचंड दबाव बनाया और अचानक जन सुराज पार्टी के साथ बातचीत का संकेत देकर NDA में अपनी अहमियत का अहसास कराया। अंततः उन्होंने 29 सीटें हासिल कीं—और अब 19 पर बढ़त लेकर यह साबित कर दिया कि उनकी राजनीतिक मांगें सिर्फ़ भावनाएं नहीं, बल्कि मजबूत ग्राउंड सपोर्ट पर आधारित थीं।
LJP (RV) का अब तक का सर्वोत्तम प्रदर्शन
चिराग पासवान के नेतृत्व में LJP (राम विलास) का यह अब तक का सबसे अच्छा विधानसभा चुनाव प्रदर्शन है। 2005 में पार्टी ने 29 सीटें ज़रूर जीती थीं, लेकिन तब यह उपलब्धि 178 सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद आई थी। इस बार मात्र 29 सीटों में से 19 पर आगे रहना चिराग की रणनीति, संगठन क्षमता और जनाधार की बड़ी जीत है। इससे यह भी साफ हो गया है कि वे अब बिहार की राजनीति में एक निर्णायक शक्ति बन चुके हैं।
आगे क्या? चिराग की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा और PM मोदी के प्रति वफादारी
चिराग ने चुनाव से पहले ही संकेत दे दिया था कि वे भविष्य में डिप्टी सीएम पद की दावेदारी कर सकते हैं, हालांकि उन्होंने कहा कि पद से ज्यादा उनके लिए पार्टी की मजबूती मायने रखती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक वफ़ादारी प्रधानमंत्री मोदी के साथ अडिग है। चिराग अब 2027 के यूपी और पंजाब चुनाव, फिर 2029 के लोकसभा चुनाव और 2030 की रणनीति पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
उनका यह आत्मविश्वास बताता है कि बिहार एक नए युवा नेता का उदय देख रहा है—जो न केवल अपने पिता की विरासत संभाल रहा है, बल्कि राजनीति की अगली पंक्ति में जगह भी बना रहा है।


