पूर्णिया के लोकप्रिय सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव ने जीएमसीएच पूर्णिया की बदहाली को लेकर आज केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने जीएमसीएच पूर्णिया में चिकित्सकों की भयावह कमी, फंड अभाव, निर्माण कार्य ठप, तथा NCC कंपनी द्वारा अस्पताल सुविधाओं को ताला लगाकर बंद रखने एवं मरीजों के उपचार में बाधा उत्पन्न करने के संबंध में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया. वे इस मुद्दे को लोकसभा में नियम 377 के तहत भी केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित कराया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है और यह स्थिति लाखों नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़ी हुई है।

उन्होंने अपने पत्र के माध्यम से कहा कि पूर्वोत्तर सीमांचल—पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज और नेपाल सीमा क्षेत्र के करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य का केंद्रीय सहारा सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH), पूर्णिया इस समय गम्भीर संकट से गुजर रहा है। प्रतिदिन लगभग 3,000 से अधिक मरीजों की निर्भरता वाले इस अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएँ चरमराई हुई हैं। दैनिक भास्कर (22-11-2025) के अनुसार, संस्थान में 200 डॉक्टरों की आवश्यकता है, जबकि मात्र 40 डॉक्टरों के सहारे पूरा संचालन चल रहा है। स्वीकृत 500 में से केवल 300 बेड ही चालू हैं, जिससे गंभीर मरीजों को घंटों इंतजार और जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
पप्पू यादव ने इस अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा कि ICU, Modular OT, SNCU/PICU, Speciality Ward और Trauma Unit जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों का निर्माण फंड की कमी के कारण वर्षों से अधर में लटका है। इससे आपातकालीन सेवाओं में बड़ा संकट पैदा हो गया है। निर्माण कार्य में देरी का सीधा असर गंभीर मरीजों के उपचार पर पड़ रहा है, जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
सांसद ने कहा कि सबसे अमानवीय स्थिति यह है कि निर्माण कार्य कर रही NCC Construction Company ने अस्पताल की लिफ्ट पर ताला लगा दिया है, कई वार्ड-कमरों को बंद कर संचालन बाधित कर दिया है। लिफ्ट बंद होने से स्ट्रेचर व व्हीलचेयर मूवमेंट रुक गया है और मरीजों को मजबूरन जमीन पर लेटकर इलाज करवाना पड़ रहा है। यह न केवल जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ है बल्कि अस्पताल परिसर पर अनुचित कब्ज़ा, आपात सेवाओं में बाधा और जीवन के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है। फंड विवाद यदि है भी, तो किसी निजी कंपनी को किस अधिकार से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करने की अनुमति मिल सकती है—यह बड़ा प्रश्न है।
उन्होंने इस गंभीर परिस्थिति को देखते हुए केन्द्रीय मंत्री से मांग करते हुए कहा कि—(1) तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टरों एवं स्टाफ की अतिरिक्त तैनाती/प्रतिनियुक्ति की जाए, (2) रुके हुए निर्माण के लिए आवश्यक फंड का शीघ्र निर्गमन किया जाए, (3) NCC कंपनी को निर्देशित किया जाए कि सभी लिफ्ट, वार्ड और कमरे तुरंत खोले जाएँ, (4) कंपनी की भूमिका की जाँच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा (5) फंड विवाद का समाधान प्रशासनिक स्तर पर सुनिश्चित हो ताकि किसी मरीज को कोई क्षति न पहुँचे।
सांसद ने सरकार से मांग की कि वह तुरंत हस्तक्षेप करते हुए फंड जारी करे, निर्माण कार्य बहाल करवाए और डॉक्टरों की भर्ती सहित सभी आवश्यक कदम उठाए, ताकि जीएमसीएच पूर्णिया को एक पूर्ण रूप से कार्यरत मेडिकल संस्थान के रूप में स्थापित किया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो हजारों मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है, इसलिए इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


