देश की राजनीति में पाँच दशकों से अधिक समय तक अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा- “श्री शिवराज पाटिल जी के निधन से अत्यंत दुखी हूँ। वे एक अनुभवी नेता थे, जिन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में MLA, MP, केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र तथा लोकसभा के स्पीकर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। समाज कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उल्लेखनीय रही। कुछ महीने पहले मेरे आवास पर उनसे मुलाकात हुई थी। इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार के साथ हैं। ओम शांति।”
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1935 में महाराष्ट्र के लातूर ज़िले के चाकुर गाँव में जन्मे शिवराज पाटिल 1960 के दशक में नगर परिषद अध्यक्ष से लेकर सात बार लोकसभा सांसद, महाराष्ट्र के विधायक और देश की राजनीति में एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरे। उन्होंने रक्षा, नागरिक उड्डयन और गृह मंत्रालय सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला।
1991 से 1996 तक वे लोकसभा अध्यक्ष रहे और बाद में राज्यसभा में नेता सदन भी बने। 2009 से 2014 तक वे पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक रहे। हालांकि 2008 मुंबई हमलों के दौरान गृह मंत्रालय की भूमिका को लेकर उनकी आलोचना हुई थी, जिसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बावजूद उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, सरल स्वभाव और ईमानदारी के लिए उन्हें व्यापक सम्मान मिला।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा- “पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शिवराज पाटिल जी का निधन अत्यंत दुखद और पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। जनसेवा के प्रति उनका समर्पण और राष्ट्र के लिए उनके योगदान हमेशा याद किए जाएंगे। इस कठिन घड़ी में मेरी संवेदनाएँ पूरे पाटिल परिवार के साथ हैं।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा -“शिवराज पाटिल जी गरिमा, अनुशासन और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के प्रतीक थे। उन्होंने संविधानिक और संसदीय जिम्मेदारियों का अत्यंत सम्मानजनक ढंग से निर्वहन किया। उनका जाना कांग्रेस और देश दोनों के लिए बड़ी क्षति है।”
शिवराज पाटिल के निधन से भारतीय राजनीति ने एक सादगीपूर्ण, ईमानदार और अनुभवी नेता खो दिया है। उनकी निष्ठा, सार्वजनिक जीवन में उनकी प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त करने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। भावपूर्ण श्रद्धांजलि।


